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चाणक्य नीति

दुखी-रोगी लोगों के बीच रहने वाला व्‍यक्ति

 

जो व्‍यक्ति हर समय दुखी और रोगी लोगों के साथ रहे, वह विद्वान और सुखी होने के बाद भी कुछ ही समय में निराशा का शिकार हो जाता है. उसका जीवन भी दुख में बीतने लगता है.

 

दुष्‍ट महिला

 

जिस तरह अच्‍छी, चरित्रवान, शिक्षित महिला का साथ पुरुष के जीवन को सफलता और सुखों से भर देता है, वैसे ही दुष्‍ट महिला का साथ दुखों से भर देता है. यदि पत्‍नी दुष्‍ट-झगड़ालू हो तो दुनिया का कोई भी सुख-संपत्ति जीवन के दुखों को कम नहीं कर सकता.

 

मूर्ख शिष्‍य

 

गुरु कितना भी योग्‍य हो, उसकी दूर-दूर तक कितनी भी कीर्ति क्‍यों न हो यदि उसका कोई शिष्‍य मूर्ख हो तो गुरु का जीवन दुखी होने में देर नहीं लगती है. मूर्ख शिष्‍य न केवल गुरु को लज्जित कराता है, बल्कि अपनी मूर्खता से गुरु के जीवन में कई अड़चनें भी डालता है.

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