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खुशहाल जीवन के लिए धन बेहद जरूरी, चाणक्य नीति कैसे करता धन संचय…

आचार्य चाणक्य : कुशल अर्थशास्त्री माने जाने वाले आचार्य चाणक्य ने धन और लक्ष्मी को लेकर कई नीतियों का उल्लेख किया है. वो बताते हैं कि कैसे मनुष्य धन को लंबे समय के लिए संचित करके रख सकता है. वर्तमान समय में खुशहाल जीवन के लिए धन बेहद जरूरी है ऐसे में चाणक्य की ये नीतियां अहम हो जाती हैं. आइए जानते हैं इन नीतियों के बारे में….

 

कुशल अर्थशास्त्री माने जाने वाले आचार्य चाणक्य ने धन और लक्ष्मी को लेकर कई नीतियों का उल्लेख किया है. वो बताते हैं कि कैसे मनुष्य धन को लंबे समय के लिए संचित करके रख सकता है. वर्तमान समय में खुशहाल जीवन के लिए धन बेहद जरूरी है ऐसे में चाणक्य की ये नीतियां अहम हो जाती हैं. आइए जानते हैं इन नीतियों के बारे में….

 

????पैसा कमाना और पैसे को बचाना

✴️दोनों ही बेहद जरूरी है लेकिन धन कमाने से ज्यादा जरूरी धन के बचाना होता है. धन संचय करने की कला में माहिर व्यक्ति भविष्य में कभी मात नहीं खाता और कठिन से कठिन समय में भी सामान्य जीवन जी रहा होता है. इसके उलट पैसे को बेहिसाब खर्च करने वाला व्यक्ति बुद्धिहीन कहलाता है. ऐसा मनुष्य मुसीबत की घड़ी में हाथ मलता रह जाता है.

 

✴️पैसा कमाने के लिए जोखिम उठाना पड़ता है और जीवन में चुनौतियों का सामना करने वाला व्यक्ति हमेशा कामयाब होता है. इसलिए जोखिम उठाना चाहिए, घबराना नहीं चाहिए. पेशा कोई भी हो, सफलता में जोखिम की भूमिका ज्यादा होती है.

 

✴️लक्ष्मी को चंचल माना गया है. इसलिए पैसे का उपयोग सही जगह और सही समय के हिसाब के करना चाहिए. इसका इस्तेमाल साधन के रूप में किया जाना चाहिए. क्योंकि गलत मकसद के लिए या अय्याशी के लिए धन को खर्च करने वाला व्यक्ति एक समय बाद नष्ट हो जाता है.

 

✴️चाणक्य के मुताबिक व्यक्ति को अगर पैसे के लिए अधर्म का मार्ग अपनाना पड़े या पैसे के लिए दुश्मन से हाथ मिलाना पड़े, उसके सामने झुकना पड़े तो ऐसे धन से दूर रहना ज्यादा उचित होता है.

 

✴️पैसे को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को लक्ष्य का पता होना जरूरी है. अगर लक्ष्य ही निर्धारित नहीं होगा तो वो सफलता हासिल नहीं कर पाएगा. चाणक्य के मुताबिक धन संबंधी कार्यों की जानकारी किसी और नहीं देना चाहिए. अपनी गुप्त बातें बताने पर आपके काम के बिगड़ने की संभावना बढ़ जाती है.

 

✴️धन बचाने का सबसे अच्छा तरीका खर्च पर नियंत्रण को बताया गया है. चाणक्य के मुताबिक जिस प्रकार बर्तन का पानी रखे-रखे खराब हो जाता है वैसे ही संचित धन का इस्तेमाल न करने पर एक समय बाद उसकी कोई वैल्यू नहीं रहती. इसलिए पैसे का इस्तेमाल सुरक्षा, दान और व्यापार में निवेश के तौर पर किया जाना चाहिए.

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