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छत्तीसगढ़: PSC की भर्ती पर रोक, असिस्टेंट प्रोफेसर और डेमोस्ट्रेटर नर्सिंग में सिर्फ महिलाओं को पात्रता देने का विरोध, 91 पदों पर होनी है नियुक्ति

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग की ओर से की जा रही सहायक प्राध्यापक और डेमोस्ट्रेटर नर्सिंग के पदों की भर्ती पर रोक लगा दी है। दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने PSC पर आरक्षण नियमों का उल्लंघन करते हुए इन पदों पर सिर्फ महिलाओं को प्राथमिकता देने का विरोध करते हुए चुनौती दी है। प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश दिया है।

छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग ने बीते दिसंबर महीने में सहायक प्राध्यापक नर्सिंग और डेमोस्ट्रेटर नर्सिंग के 91 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। इसमें राजपत्र में जून 2013 में चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम के अनुसार इन पदों के लिए सिर्फ महिलाओं को ही पात्र माना गया है।

जारी विज्ञापन में भी सिर्फ महिलाओं को ही भर्ती करने का उल्लेख किया गया है। PSC की भर्ती प्रक्रिया और भर्ती नियम 2013 को चुनौती देते हुए कोरिया के ऐल्युस खलखो, आदित्य सिंह ने अधिवक्ता घनश्याम कश्यप और नेल्शन पन्ना के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में इसे आरक्षण नियमों के विपरीत बताया गया है। साथ ही कहा है कि जिन पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। उसकी पढ़ाई पुरुष वर्ग के प्रतियोगी भी करते हैं। लेकिन, इन पदों पर उन्हें नियुक्ति के लिए वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 में दिए गए आरक्षण नियमों का उल्लंघन है। चीफ जस्टिस अरूण कुमार गोस्वामी और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के तर्कों पर सहमति जताते हुए अगली सुनवाई तक PSC के विज्ञापन और भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

महिलाओं को 100 फीसद आरक्षण देना गलत 
याचकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि किसी भी पद पर भर्ती के लिए महिलाओं को 100 फीसदी आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। राज्य शासन ने राजपत्र में चिकित्सा शिक्षा भर्ती सेवा नियम 2013 बनाया है। यह संविधान में दिए गए आरक्षण नियमों के खिलाफ है। PSC ने उसी नियम का हवाला देते हुए यह विज्ञापन जारी किया है। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की गई है।

राज्य शासन और PSC ने कहा-गर्ल्स कॉलेज है इसलिए बनाया नियम
याचिका में राज्य शासन और PSC ने अपना जवाब भी प्रस्तुत कर दिया है। इसमें बताया गया कि जिन नर्सिंग कॉलेजों में भर्ती की जा रही है वहां सिर्फ महिला वर्ग ही दाखिला ले सकती हैं। महिला वर्ग की पढ़ाई के लिए महिला स्टॉफ की व्यवस्था करने के लिए यह नियम बनाया गया है। लेकिन, हाईकोर्ट ने शासन के तर्कों पर असहमति जताते हुए फिलहाल इसे मानने से इंकार कर दिया है

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